गायत्री मंत्र के 13 गुप्त उपाय – सवा लाख गायत्री मंत्र का प्रभाव

गायत्री मंत्र के 13 गुप्त उपाय – सवा लाख गायत्री मंत्र का प्रभाव – गायत्री मंत्र के बारे में तो हम सभी लोग जानते ही हैं. किसी व्यक्ति को कोई अन्य मंत्र बोलना आए या ना आए. लेकिन गायत्री मंत्र हर किसी को बोलना आता हैं. ऐसा माना जाता है की गायत्री मंत्र के जाप से समस्त परेशानियों का निपटारा हो जाता हैं.

इस मंत्र में मनुष्य के पापों को समाप्त करने की शक्ति हैं. वेदों में भी गायत्री मंत्र को सबसे सर्वश्रेष्ठ मंत्र माना गया हैं. गायत्री मंत्र के जाप से मनचाही वस्तु और इच्छा पूर्ति की प्राप्ति की जा सकती हैं.

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दोस्तों आज हम आपको इस आर्टिकल के माध्यम से गायत्री मंत्र के 13 गुप्त उपाय तथा सवा लाख गायत्री मंत्र का प्रभाव के बारे में बताने वाले हैं. इसके अलावा यह भी बताने वाले है की गायत्री मंत्र का जाप कितनी बार करना चाहिए. यह सभी महत्वपूर्ण जानकारी पाने के लिए हमारा यह आर्टिकल अंत तक जरुर पढ़े.

तो आइये हम आपको इस बारे में संपूर्ण जानकारी प्रदान करते हैं.

गायत्री मंत्र के 13 गुप्त उपाय

गायत्री मंत्र के 13 गुप्त उपाय हमने नीचे बताए हैं.

  1. अगर किसी व्यक्ति के ऊपर भुत तथा बुरी आत्मा का शाया हैं. तो 108 बार गायत्री मंत्र का जाप करने के पश्चात सिर्फ जल का फूंक लगाने पर बुरी आत्मा तथा भुत आदि से मुक्ति मिलती हैं.
  2. अगर किसी के ऊपर अग्निदोष या शत्रु दोष हैं. तो ऐसे दोष से बचने के लिए रोजाना नियमित रूप से 108 बार गायत्री मंत्र जाप करे. इसके पश्चात मिट्टी का ठेला आपको किसी भी दिशा में फेंक देना हैं. जिस दिशा में आप मिट्टी का ठेला फेंकते हैं. उस दिशा का शत्रु तथा अग्निदोष दूर हो जाएगा.
  3. अगर आप किसी भी प्रकार की बीमारी से पीड़ित हैं. तो अंतर्भाव से गायत्री मंत्र जाप करने के पश्चात कुशा पर फूंक मारकर शरीर का स्पर्श करने से बीमारी दूर हो जाती हैं.
  4. शमी, पीपल, बरगद तथा गुलर की लकड़ियों से 108 बार गायत्री मंत्र जाप करते हुए हवन में आहुति देने से ग्रह शांति मिलती हैं.
  5. नदी के पानी में कंठ तक खड़े रहकर 108 बार गायत्री मंत्र का जाप करने से प्राण की रक्षा होती हैं.
  6. अगर शनिवार के दिन पीपल के पेड़ के नीचे खड़े रहकर गायत्री मंत्र का जाप करते हैं. तो हमारे घर की सभी गृह बाधा समाप्त हो जाती हैं.
  7. लक्ष्मी की प्राप्ति के लिए लाल कमल तथा शाली चावल से गायत्री मंत्र के साथ हवन करे.
  8. पुष्प, घी, बिल्व तथा फल से गायत्री मंत्र के साथ हवन करने से धन की प्राप्ति होती हैं.
  9. आम के पत्तो को गाय के दूध में डुबोकर गायत्री मंत्र के जाप के साथ हवन करने से हमारी सभी प्रकार की बाधा दूर होती हैं.
  10. कुष्ठ रोगों के निवारण के लिए शंख पुष्पी के पुष्प से गायत्री मंत्र हवन करना चाहिए.
  11. बेंत की लकड़ी से गायत्री मंत्र का हवन करने से बाधाएं दूर होती हैं.
  12. सर्व सुख की प्राप्ति करने के लिए गायत्री मंत्र का जाप करते हुए फुल का हवन करे.
  13. गुरुची के पौधों को गाय के दूध में डुबोकर 108 बार गायत्री मंत्र पढ़कर हवन करने से मृत्यु योग का निवारण हो जाता हैं.

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गायत्री मंत्र का जाप कितनी बार करना चाहिए

गायत्री मंत्र का जाप आप अपनी इच्छा अनुसार 5, 11, 21 या 108 बार कर सकते हैं. अगर आप इससे भी अधिक बार गायत्री मंत्र का जाप करना चाहते हैं. तो इससे अधिक बार भी गायत्री मंत्र का जाप कर सकते हैं.

सवा लाख गायत्री मंत्र का प्रभाव

सवा लाख बार गायत्री मंत्र का जाप करने के साथ हवन करने से पर्यावरण शुद्ध होता हैं. इसके अलावा प्राकृतिक आपदाओं तथा आसुरी शक्तियों से मुक्ति मिलती हैं.

गायत्री मंत्र हिंदी में / गायत्री मंत्र लिखा हुआ

“गायत्री मंत्र:- ॐ भूर्भुव: स्व: तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि धियो यो न: प्रचोदयात्।“

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गायत्री मंत्र का अर्थ हिंदी में

उस प्राण स्वरूप दुःख नाशक और सुख स्वरूप, तेजस्वी, श्रेष्ठ, देव स्वरूप पाप नाशक परमात्मा को हमे हमारे अंदर अंतरात्मा में धारण करना चाहिए. वह परमात्मा हमारी बुद्धि को सही दिशा में जाने के लिए और सन्मार्ग में प्रेरित करे.

“प्रणव ॐ” का अर्थ होता है की परमात्मा सभी जीव में समाये हुए हैं. इसलिए हमें निष्काम से अच्छे कर्म करने चाहिए.

“भू” का अर्थ होता है की हमे हमारे आत्मबल को बढ़ाना चाहिए और सही दिशा में आगे बढना चाहिए.

“र्भुव:” का अर्थ होता है की  संस्कारो में जूझते रहने वाला मनुष्य एक दिन देवत्व की प्राप्ति करता हैं.

“स्व:” का अर्थ होता है की सयंम और त्याग की नीति का आचरण करने के लिए खुद को और दुसरो को इससे प्रेरित करना चाहिए.

“तत्स” का अर्थ होता है की जो लोग जन्म और मरण के रहस्य को जानता है वह बुद्धिमान होता है. ऐसे लोग भय मुक्त जीवन जीते हैं.

“सवित्यु” का अर्थ होता है की प्रत्येक मनुष्य को जिस प्रकार सूर्य का तेज है. उसी प्रकार सूर्य के समान तेज होना चाहिए.

“वरेण्यम” का अर्थ होता है की प्रत्येक मनुष्य को श्रेष्ठ विचार करना चाहिए. श्रेष्ठ कार्य करने चाहिए.

“भर्गव” अर्थ होता है की मनुष्य को निष्पाप होना चाहिए. पाप मनुष्य के लिए अच्छा नहीं हैं. मनुष्य को पाप करने से बचना चाहिए.

“देवस्य” मनुष्य के भीतर और बाहर देवलोक शक्ति होती हैं. इसलिए मनुष्य की दृष्टि शुद्ध होनी चाहिए.

“धीमहि” का अर्थ होता है की मनुष्य को अपने भीतर पवित्र शक्ति का समावेश करना चाहिए. इसके बीना उद्धार नही हैं.

“धियो” अर्थ होता है की हमे बुद्धिमानी से काम करना चाहिए. अपने विचार और आचरण से वर्तमान परिस्थति को संभालना चाहिए.

“यो न:” शब्द का अर्थ होता है की हमारे भीतर जो भी शक्ति और साधन मौजूद है. उसका उपयोग हमारे लिए आवश्यकता के अनुसार कम से कम करे. शेष शक्ति और साधन नि:स्वार्थ भाव से अन्य में बांट दे.

“प्रचोदयात” का अर्थ होता है की मनुष्य को स्वयं सही राह पर चलना चाहिए. और लोगो को भी सही राह पर चलने के लिए प्रेरणा देनी चाहिए.

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निष्कर्ष

दोस्तों आज हमने आपको इस आर्टिकल के माध्यम से गायत्री मंत्र के 13 गुप्त उपाय तथा सवा लाख गायत्री मंत्र का प्रभाव बताया हैं. इसके अलावा यह भी बताया है की गायत्री मंत्र का जाप कितनी बार करना चाहिए.

हम उम्मीद करते है की गायत्री मंत्र के 13 गुप्त उपाय आपके लिए उपयोगी साबित हुए होगे. अगर उपयोगी साबित हुए हैं. तो आगे जरुर शेयर करे. ताकि यह महत्वपूर्ण जानकारी अन्य लोगो तक भी पहुंच सके.

दोस्तों हम आशा करते है की आपको हमारा यह गायत्री मंत्र के 13 गुप्त उपाय – सवा लाख गायत्री मंत्र का प्रभाव आर्टिकल अच्छा लगा होगा. धन्यवाद

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गायत्री मंत्र के 13 गुप्त उपाय – सवा लाख गायत्री मंत्र का प्रभाव

 

Shailesh Nagar

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